रविवार, 30 मई 2021

विशेष आदिवासी क्षेत्र प्रदेश का 5वां संक्रमित क्षेत्र (त्रिलोकीनाथ)

 दूसरी लहर के लॉक डाउन का अंतिम दिन

151 शहडोल 525 अनूपपुर 308 उमरिया में कोरोना से सक्रिय मरीज

विशेष आदिवासी क्षेत्र प्रदेश का पांचवा संक्रमित  दर्ज 




                  (त्रिलोकीनाथ)

 कोविड-19 के दूसरी लहर के अंतिम दिन 31 मई 2021 में शहडोल संभाग यानी पुराना शहडोल जिला प्रदेश के सर्वाधिक पांच में कोरोनावायरस संक्रमित क्षेत्र दर्ज हुआ है। संक्रमण की गति में वैसे देश में शहडोल का बड़ा नाम रहा है और तारीफे काबिल यह है की आज वह क्षेत्र का सर्वाधिक कम संक्रमित 151 सक्रिय मरीजों के साथ सामने आया कुल 117 लोग दूसरी लहर के शिकार हो गए। इसमें पोस्टकोबिट से मरने वाले हार्टअटैक के अथवा कोविड-19 जनित डिप्रेशन से आत्महत्या करने वाले व्यक्तियों का घोषित संख्या नहीं है। क्योंकि सरकार मानती है कि जो कोरोना भाई साहब की वजह से सीधे मरा हो याने शिकार हुआ हो शरीर में कोरोना  रहा और व्यक्ति मर गया तो वही कोविड-19 से मृत घोषित व्यक्ति माना जाएगा। बाकी जो कि कॉविड के बाद जैसा कि डॉ मुकुंद चतुर्वेदी की बात माने तो 6 महीने तक कोविड-19 असर रहता है इस दौरान कोविड-19 से डिप्रेशन अथवा हार्ट अटैक से मरने वालों को सरकार फिलहाल तो ऐसा कोई घोषणा नहीं की है कि उन्हें कोविड-19 से मृत माना जाएगा।

 इसमें वे सभी व्यक्ति भी नहीं है जोकि मेडिकल कॉलेज शहडोल में कथित ऑक्सीजन की कमी से दुर्घटना के कारण 16 से 22 लोग मृत्यु हो जाने की चर्चित खबरें सामने आई थी। जोकि भारत का अपने प्रकार का पहला ऑक्सीजन की कमी से मरने की खबरों में चर्चित हुआ था। 

बाहरहाल 5 विकासखंड वाले शहडोल में वर्तमान में सिर्फ 151 व्यक्ति सक्रिय कोविड पेशेंट हैं जबकि तीन विकासखंड वाले अनूपपुर जिले में 525 व्यक्ति और दो विकासखंड वाले उमरिया जिले में 308 व्यक्ति अभी भी एक्टिव मरीजों के आंकड़े को लेकर दर्ज हैं।

इस तरह शहडोल का प्रबंधन बधाई का पात्र कहा जा सकता है कि उन्होंने अपनी कुशलता से 151 एक्टिव मरीजों के रूप में शहडोल को सुरक्षित रखा है। बावजूद इसके शहडोल अनूपपुर और उमरिया के ने पुराना शहडोल जिला के 25 382 व्यक्ति नागरिक कोरोनावायरस से संक्रमित प्रदर्शित किए जा चुके हैं। बाकी किल कोरोनावायरस अभियान मैं कोरोना को गांव में ही किल किया जा रहा है ऐसा मानना चाहिए। जो प्रदेश के इंदौर भोपाल ग्वालियर जबलपुर के बाद सर्वाधिक पांचवा बड़ा आंकड़ा दर्ज है और भारत में शायद पहला आदिवासी विशेष क्षेत्र देखना होगा ।देखना होगा संविधान में विशेष सुरक्षा प्राप्त पांचवी अनुसूची में दर्ज क्षेत्र के नागरिकों को सरकार किस प्रकार से घोषित व अघोषित तरीके से कोरोना की रफ्तार से बचा पाती है। फिलहाल तो कांग्रेस अध्यक्ष आजाद बहादुर ने सरकारी प्रबंधन आपदा प्रबंधन समितियों की बैठक को भाजपा की बैठक के रूप में बताया था। उम्मीद करना चाहिए कि घोषित नहीं तो अघोषित तौर से वास्तविक रूप में पुराने संयुक्त शहडोल को कोरोना संक्रमण से बचाने के सभी रास्ते अपनाए जाने चाहिए नहीं तो संक्रमण से होने वाली अन्य बीमारी जैसे डिप्रेशन, हार्ट अटैक, ब्लैक फंगस आदि इत्यादि का फैलाव हो सकता है।

 इस तरह  विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत है। क्योंकि जिस प्रकार से कोरोनावायरस की लहर अराजकता के साथ नंगा नाच किया है अगर तीसरी लहर जो कथित तौर पर बच्चों के ऊपर ज्यादा प्रभावित होगी को सही तरीके से नहीं मॉनिटरिंग की गई अथवा उसका प्रबंधन किया गया तो हालात घोषित और अघोषित तौर पर इससे भी भयानक होंगे आशा करनी चाहिए सभी को साथ लेकर ना कि आपदा को अवसर के रूप में देखकर भाजपा अपने नागरिकों को महामारी के चक्रव्यू से बचा पाएगी।



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