बुधवार, 26 मई 2021

लाखों की मौतों का प्रायश्चित कैसे होगा..? त्रिलोकीनाथ

 

इतना ना ऊंचा उड़ो ...

कोरोना के

अनजाने वरदान,


लाखों की मौतों का प्रायश्चित कैसे होगा..?

(त्रिलोकीनाथ)

माना कि कोरोना उन्हें कई वरदान दिए थे नए संसद भवन बनाने का वरदान, राम मंदिर निर्माण का वरदान और करोना कार्य काल में संसद के जरिए कई विधेयक में संशोधन या  बिलों को पारित करने का वरदान....। जिससे उनका बहुमुखी व्यक्तित्व दुनिया में छा जाने वाला था....। किंतु इन तमाम वरदानों में आपने तीन लाख से ज्यादा घोषित तथा कई गुना अघोषित भारतीय नागरिकों की मौत का वरदान, कम से कम यह तो नहीं मांगा रहा होगा...?

 यह अनचाहा मुकुट आपके सिर पर रख दिया गया.. दुनिया की सबसे बड़ी 3 हजार करोड़ रुपए की मूर्ति वल्लभ भाई पटेल की बनाकर इतिहास को हाईजैक करने का जो प्लान बनाया गया था वह अब बहुत बौनी नजर आती है, क्योंकि अब आपकी जीवित मूर्ति  उससे कई गुना बड़ी हो गई है। फर्क यह है कि आप दुनिया भर में भारतीय नागरिकों को अपनी अराजक कार्यपणाली  से कोरोना वायरस के कारण मर जाने की वजह के रूप से जाने जाएंगे और इस दाग को वे  10 करोड़ सदस्यों की ताकत से भी मिटा नहीं सकते। 

जब जब आप याद आएंगे लाखों की मौत आपके पीछे खड़ी दिखेगी, बावजूद आप फिर से चुने जाएंगे। यह लोकतांत्रिक व्यवस्था की कमियों का सबसे बड़ा प्रमाण पत्र होगा। 

 जब लाखों लोगों की अनचाहे मौत का वरदान आपको मिला तो क्या आप ने पीछे मुड़कर देखना चाहा कि आपको प्रायश्चित करने का ठीक अवसर चीनीकोरोना के पहले से 3 कृषि बिल थोपे जाने के रूप में जिंदा है और कोरोना के महामारी के दौर में भी जिंदा रहा और आगे भी चलेगा।


 क्योंकि जब गंगा के बगल में भगवा चादर के तले भारतीय नागरिकों की लाशे आंखों में चुभने लगते हैं और उन्हें मिटाने का काम होता है ऐसे में कृषि बिल के विरोध में चल रहे आंदोलन का 6 माह पूरा हो जाने पर हर किसान जो आंदोलन का पक्षधर है काले झंडे लेकर आपके सामने खड़ा है तो एक प्रश्न तो बनता है कि कुछ गड़बड़ तो है...। परम प्रिय चाहे उसका रंग भगवा रहा अथवा किसानों के झंडे का रंग काला

रहा हो यह दोनों ही एक जैसे आपकी आंखों में अनचाहे वरदान के रूप में चीनी-कोरोना के बाद भारतीय-कोरोना तक दुनिया में चर्चित हो गए । 

इतने बड़े आमूलचूल परिवर्तन के बाद भी की श्मशान में दफनाए गए लाशों पर भगवा और काले झंडे के कपड़े भी क्या लोकतांत्रिक संभावनाओं पर आपको खड़े होने की वजह पैदा नहीं करती...?

 यदि इन हालात में भी संभावना मर गई है बिना एक पल देरी किए तो यह तय हो गया है कि आपकी मंशा और आपकी निष्ठा दोनों ही आपके हाथ में नहीं रह गई है... आप किसी बड़ी शक्ति से रिमोट कंट्रोल से चलने वाले खिलौने की तरह मात्र हैं... जो संवेदनहीन होकर कहीं भी किसी से भी टकरा जाने को चलता है। क्या इससे बचा नहीं जा सकता....? क्या किसानों से चर्चा, झूठा ही सही प्रारंभ नहीं की जा सकती...? यह दिखाने के लिए कि लोकतंत्र में आप एक नेता भी हैं... यह एक पीड़ा है, पीड़ा इसलिए कि आपके कोरोनावायरस-भगवान से अनचाहे वरदान में हमने भी अपने युवा भतीजे अनूप को खो दिया।

 दर्द इसलिए भुलाने की कोशिश है कि लाखों लोगों की मौत का दुख मनाए या अपने दुख से दुखी हो जाएं ... किंतु यह बातें आपदा को अवसर में बदलने वाले विचारधारा के क्या समझ में आएंगे..?

 ऐसे हालत में भी अगर करोड़ों किसानों के अहित की आशंका  को लेकर जरा भी आप संवेदनशील नहीं हैं तो यह गुलामी का बड़ा प्रमाण पत्र होगा.., किंतु हमें यह जानने का अधिकार होना ही चाहिए कि आखिर किन के लिए हमारा नेतृत्व गुलामी कर रहा है...। क्योंकि जो दिख रहे हैं  वह भी मालिक नहीं दिखते.....?


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