रविवार, 11 जुलाई 2021

तो क्या देखेंगे करुणानिधान भगवान जगन्नाथ....?

नगर भ्रमण पर भगवान जगन्नाथ देवी सुभद्रा और बलभद्र महाराज

तो क्या देखेंगे करुणानिधान





भगवान जगन्नाथ....?

(त्रिलोकीनाथ)

आज शहडोल में भी भगवान जगन्नाथ स्वामी बलभद्र महाराज और अपनी बहन देवी सुभद्रा जी के साथ रथ पर सवार होकर नगर यात्रा के लिए निकलेंगे। शताब्दी की सबसे बड़ी महामारी का परंपरागत आगमन 2020 में कोविड-19 के रूप में विश्व भर में तबाही मचा अपनी सदी की यात्रा प्रारंभ कर चुका, दूसरी लहर समापन के साथ तीसरी लहर पर भी सवार होकर वह दुनिया भर में तबाही मचाएगा... एक ऐसा भी अनुमान है  ।

 कोरोना वायरस की यह यात्रा विशिष्ट मानव समुदाय के लिए भारी लाभप्रद भी रही, उसके विकास में चार चांद लगाया। जैसे सूदखोरों के लिए, सत्ता में बैठे हुए नेताओं के लिए और अधिकारियों, चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े हुए लाभ कमाने की दृष्टिकोण से काम कर रहे सभी तत्वों के लिए, यह कोरोनावायरस कई के लिए कोरोनाभाई साहब के रूप मे यात्रा बहुत सुखद रही। उन्होंने  कई पीढ़ियों के लिए इतना धन अर्जित कर लिया कि बैठ कर खा सकते हैं।

 100 वर्ष मे होने वाली महामारी कोरोना की यात्रा से जिन्हें तन-मन-धन की हानि हुई, जिनका परिवार तबाही की श्रेणी में आ गया। अकेले भारत में आधा करोड़ की आबादी कहते हैं इस महामारी में मारी गई।  करोड़ों नागरिक बेकारी बेरोजगारी और सूदखोरी के शिकार हुए। कोरोना साहब की यात्रा कुछ के लिए वरदान तो कुछ के लिए अभिशाप साबित हुई। मानवीय सभ्यता को दहला देने वाली और लोगों का चेहरा साफ करने वाली यात्राओं से बहुत सारी स्थितियां साफ हो जाते हैं, यह भी स्पष्ट हुआ।

 किंतु जिस भगवान जगन्नाथ स्वामी की रथ यात्रा से प्रभावित होकर राममंदिर रथ यात्रा के लिए लालकृष्ण आडवाणी राम की नकाब में अपने अपने राजनीतिक उद्देश्यों को पाने के लिए जो यात्रा प्रारंभ की थी उसका समापन कोरोना महामारी के दौर में अयोध्या में 5 अगस्त को 20 मे  पांच लोगों की उपस्थिति में खत्म हो गया। जब हिंदुत्व ब्रांड  के राममंदिर का शिलान्यास हुआ।


 और साल भर भी नहीं बीते थे राममंदिर निर्माण में करोड़ों की भू-माफिया गिरी के कलंक ट्रस्ट के चंपत राय के ऊपर लगे। हलां आपकी उन्होंने  हिंदू होने की गर्व के साथ कहा है कि उनके ऊपर महात्मा गांधी के हत्या के आरोप भी लगे हैं कोई फर्क नहीं पड़ता।

 हाल में खबर लगी है कि चित्रकूट में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, चंपत राय के ईस्ट-संस्था ने उन्हें हिंदुत्व के राम मंदिर के लिए जमीन खरीदने पर प्रतिबंधित कर दिया है। क्योंकि भगवान की प्रभुसत्ता का आभामंडल को हो रही  क्षति से उत्तर प्रदेश के व अन्य होने वाले चुनाव में उसे प्रभावित कर सकता था।

 यह अलग बात है कि गुजरात से शुरू हुई राम मंदिर रथयात्रा की नीव की ईट के रूप में आडवाणी जीते जी समाहित हो गए। उन्हें प्रकट मंदिर मे पहुंचने का अवसर भी नहीं मिला ।और शायद यही कारण था कि चंपत राय जैसे ट्रस्टी राम मंदिर के नाम पर अपनी मनमानी करने लगे। क्योंकि नैतिकता की व्यक्तिगत आचार संहिता खत्म हो चुकी थी।

 तो शहडोल में भी हर साल भगवान जगन्नाथ स्वामी के नाम पर रथ यात्रा होती है। 2012 में


शहडोल के राम्मंदिर पर हाईकोर्ट ने अपना फैसला दिया था की न्यायालय से नर्णय होने तक विवादित पक्षकार मंदिर के प्रबंधन से दूर रहें। इसके लिये उसने वकायदे एक स्वतंत्र कमेटी का निर्माण का निर्देश भी किया, मंदिर के प्रबंधन हेतु "स्वतंत्र कमेटी" बनी जरूर; किंतु वह अबतक गुलामों की तरह अपना व्यवहार करती रही। उसने भ्रष्ट ट्रस्टीयों के सामने स्वयं को सरेंडर कर दिया। क्योंकि स्वतंत्र कमेटी के लोगों को मालूम था कि उसकी व्यक्तिगत हैसियत सिर्फ भ्रष्टाचारियों को संरक्षण करने की है। शायद उन्हें न्यायपालिका पर भरोसा नहीं है और शहडोल का राम मंदिर भी लूट पाठ करने वाले पिछले 10 वर्ष से इसे पंडित पुजारी का नकाब पहनकर, ट्रस्टी खुला डाका डालते रहे ।और इसे कानून के सभी पहरुए देखते भी रहे। क्योंकि उन्हें डर था कि हिंदुत्व का राम मंदिर का ब्रांड जिसके पास है वह कभी भी स्वतंत्र कमेटी के सदस्यों को उसका अस्तित्व समाप्त कर सकता है।

यह डर उन्हें हमेशा बना रहेगा। इसलिए उच्च न्यायालय के निर्देशों का पालन नहीं होने से मंदिर की चल अचल संपत्ति पर खुला डाका पड़ा...? और शहडोल का तथाकथित सभ्य समाज इस प्रकार के लूटपाट का समर्थक भी यदा-कदा देखता रहा। वे इन्हीं के साथ मौन सहमति देते अखबारों में दिखते भी रहे। शायद रजनीश ने कहा था धर्म अफीम के नशे की तरह होता है।

 मध्यप्रदेश  संबंधित प्रशासनिक अधिकारी स्वयं संज्ञान लेकर राममंदिर शहडोल को खत्म कर रहे वायरसों को छेड़ना नहीं चाहते। क्योंकि वह वायरस से डरते बहुत हैं। क्योंकि "कोरोना भाई साहब वायरस" का आतंक आज भी न्यायपालिका को नियमित रूप से संचालित करने में बाधक बना हुआ है।

 अब सवाल उठता है कि भगवान जगन्नाथ स्वामी जब रथयात्रा में सवार होकर बाहर नगर का भ्रमण करते हैं तो वह क्या देख रहे होते हैं...? कहते हैं उनकी आंखें अपलक लोगों पर दयावान रहती हैं तो क्या लगातार हो रहे शहडोल राम मंदिर के अन्याय को वह जानबूझकर अपलक देख रहे हैं....? यह प्रश्न भी खड़ा होता है। अथवा, वे मंदिर के नाम पर समस्त पापाचारी के चरम-नियति पर पहुंचने का इंतजार कर रहे हैं...? क्योंकि बिना उनकी इच्छा के पत्ता भी नहीं खड़कता है.. तो, जैसे हर 100 वर्षों में कोई महामारी अपने नियमित चक्र को पूरा करती है क्या उसी तरह भगवान का सुदर्शन चक्र भी अपने चक्र के लक्ष्य के इंतजार में यात्राओं की परंपरा का निर्वहन करता है...?

 


यह बात सुनने और कहने में अच्छी लग सकती है किंतु कर्म योगी बुद्धिमान प्रशासनिक समाज यदि न्याय के मापदंडों का अनुसरण नहीं करेगा तो फिर ट्रस्ट के भ्रष्ट लोगों का मनोबल धर्म के नाम पर लूटपाट की संस्कृति को स्थापित करने में सफल रहेंगे। और उसके लिए इस कार्यकाल के सभी प्रशासनिक अधिकारी, जिन का दायित्व है; वह हमेशा इस कलंक के साथ देखे जाएंगे, इसे ऐसे भी समझा जा सकता है।

 जैसा कि कभी भाजपा के ताकतवर रहे पत्रकार से नेता बने प्रभास झा कि शब्दों में "अगर शहडोल का राम मंदिर विनाश की गति में जा रहा है तो यह भी भगवान राम की इच्छा ही है ऐसा मानकर चलें।" 

तो फिर सवाल यह भी उठता है कि चंपत राय अगर अयोध्या के राम मंदिर में चंदे के धन से भू माफिया गिरी कर रहे थे तो क्या बुरा था....? वह भी राम की इच्छा ही थी.. "भ्रष्टाचार जिनका जन्म सिद्ध अधिकार है, उनके लिए न्याय की परिभाषा इसी तरह समय अनुकूल बनती और बिगड़ती रहती" फिर भी हम भगवान जगन्नाथ स्वामी की रथयात्रा से न्याय की आशा मे उनके सामने नतमस्तक होकर प्रणाम करते रहते हैं कोई तो जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारी अपने वेतन का फर्ज निभाते हुए कर्तव्य परायण होकर हिंदू सनातन के भगवान राम की शहडोल की मोहन राम मंदिर को न्यायपालिका के आदेश से संरक्षित करेगा ।जय जगन्नाथ स्वामी।



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